66वर्ष की उम्र में कोरोना को मात देकर,घर लौटे डॉ मल्लिक

66वर्ष की उम्र में कोरोना को मात देकर,घर लौटे डॉ मल्लिक

शिवहर। हम इतने कमजोर नहीं, जो कोरोना से हार मान लें। हमारी इम्यूनिटी ही हमारा हथियार है। हमारी खुशी से ही कोरोना हारेगा। यह जज्बा डॉ. डीएन मल्लिक का है। मरीजों को देखते हुए वे संक्रमित हुए थे। जब होम इसोलेशन आइसोलेशन वार्ड पहुंचे तो लोगों को चिंता थी लेकिन डॉक्टर मल्लिक का जज्बा कभी कम नहीं हुआ।

श भरा और जीत लिया जंग-डॉ. डीएन मल्लिक आइसोलेशन में शांत नहीं बैठे। खुद में जोश भरा। मेहनत रंग लाई। निगेटिविटी के सन्नाटे को 66 की उम्र में अपने जज्बे से भगा दिया। बातचीत, योग, ध्यान से माहौल सकारात्मक बन गया।

डॉक्टर का जज्बा-डॉ. मल्लिक तरियानी पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी हैं। शिवहर के ग्रामीण इलाकों में अप्रैल में कोरोना केस मिलने शुरू हुए थे। तरियानी पीएचसी पर डॉ. मल्लिक भी मोर्चा संभाल रहे थे। इसी दौरान उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई। 22 जुलाई को उनमें भी कोरोना की पुष्टि हुई। इसके बाद वे होम आइसोलेट हो गए। यहां पहुंचने पर भी डॉ. मल्लिक अपने फर्ज से विमुख नहीं हुए। दूसरे मरीजों के साथ खुद को मनोवैज्ञानिक तरीके से कोरोना से मुकाबला करने के लिए मजबूत करते रहे। 15 दिन घर में होम क्वारंटीन से लौटने के बाद फिर कोरोना संदिग्धों के इलाज में जुटने वाले डॉ. सभी के रोल मॉडल बन गए।

इम्यूनिटी मजबूत करने पर किया फोकस-22 जुलाई को डॉ. डीएन मल्लिक घर पहुंचे तो परिवाजीजनों से सोशल डिस्टेंस बनाए रखा। इम्यूनिटी मजबूत करने पर ज्यादा फोकस किया। विटामिन सी और डी के लिए संतरा, नींबू, दही, गाय का दूध, दलिया अंडे को खाने में शामिल किया। मौसमी फल, हरी सब्जियां और दाल को अपने मेन्यू में रखा। रात में हल्दी वाला दूध भी पीया।

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